वो आलिशान और तारीखी इमारत जिसे देखकर हर इन्सान के ज़हन में बस यही ख्याल आता है |ये है एक बादशाह की मुहब्बत की निशानी जो उसने अपनी महबूब बीवी के लिए बनवाई थी |
मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाई थी ये खुबसूरत इमारत |जिसे आज हम जानते हैं ताजमहल के नाम से|ताजमहल अपनी बेलौस खूबसूरती अपने नाम के ज़रिये ज़ाहिर करता है |पर्सियन ज़बान से लिया गया लफ्ज़ है ताज महल जिसके माने होता है "इमारतो का ताज" |ताजमहल भारत में मुस्लिम कला की महानता का मुकम्मल नमूना है |1983 का वो अज़ीम दिन जब ताजमहल पहली बार विश्व धरोहरों की लिस्ट शामिल हुआ था |तबसे आज तक इसकी जगह अव्वल ही है |
शाहजहाँ की बीवी मुमताज महल जिसे वो अपनी जान की तरह प्यार करता था जब अपनी चौदहवी औलाद गौहरा बेगम की पैदाइश के वक्त मर गई तो शाहजहाँ बुरी तरह टूट गया था |कहते हैं मुमताज़ की मौत का दुःख शाहजहाँ पर इतना गहरा था की ताजिंदगी उसके होठों पर मुस्कराहट नहीं आई थी |
शाहजहाँ ने अपनी इस मुहब्बत को अमर बनाने के लिए एक ऐसी इमारत बनाने का फैसला किया जो आने वाली नस्लों के लिए एक पाक मुहब्बत की मिसाल बन गई |23 अक्टूबर 1632 को इस अज़ीम ईमारत की नीव रक्खी गई |जमुना नदी के किनारे की ये ज़मीन जो काफी गहरे में थी इसलिए बराबर करने में ही लगभग 6 से 8 महीने का वक़्त लग गया |
ताजमहल जो हर हिन्दुस्तानी के लिए एक गर्व का विषय है |इसकी भव्यता और खूबसूरती की दूसरी मिसाल मिलना नामुमकिन है |इसे बनाने में न जाने कितना वक़्त लगा न जाने कितने मजदूरों ने काम किया और न जाने कितना पैसा लगा|
हजारों साल रोती है नर्गिस अपनी बेनूरी पर
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा
फिर भी एक अंदाज़े के मुताबिक ताजमहल को बनाने में लगभग २०,००० मजदूरों ने दिन रात काम किया,२० साल का लम्बा वक़्त लगा ओर लगत आई ३ अरब ३० करोड़ रूपए | पूरी दुनिया के सबसे काबिल इंजीनियरों ने बनाया था इसे |सारी दुनिया से इसमें लगने वाला सामान मंगाया गया था |
ताज महल अपने अन्दर आने वाले हर इंसान का इन खुबसूरत लफ़्ज़ों में स्वागत करता है "ऐ रूह तुझ पर अल्लाह की रहमत बरसे ओर तु खुदा की बारगाह में आराम कर|ताजमहल की दीवारें जिन पर कुरान की 15सूरह
(छंद ) को इस पाकीजगी से उकेरा गया है जिसकी मिसाल मिलना लगभग नामुमकिन है |
(छंद ) को इस पाकीजगी से उकेरा गया है जिसकी मिसाल मिलना लगभग नामुमकिन है |
मुमताज़ महल जिसकी कब्र तहखाने में है उस पर अल्लाह के 99 नाम लिखें हैं ओर साथ में ये भी लिखा है की "उसने रजब 1076 हिजरी में इस दुनिया से विदा ली"
तमाम दुनिया की मशहूर ओर मारूफ कारीगरों की रूहें भी जब अपनी इस नक्स्निगरी को देखती होंगी तो उन्हें अपनी कला पे फख्र सा होता होगा |
अपने दमन में खूबसूरती के साथ काफी मनघडंत कहानियां भी समेटे हुए है ताज महल |जिनमें एक जो सबसे मशहूर है वो है की बादशाह ने ताज महल बनाने वालों के हाथ कटवा लिए थे ताकि इस जैसी दूसरी कोई इमारत न बन सके गलत ओर बेबुनियाद है |
जीन बाप्टिस्ट जो 1663 में आगरा आया था उसने लिखा है हाथ कटवाने की बात गलत है |हाँ बादशाह ने उन लोगों से इस बात के दस्तखत ज़रूर करवा लिए थे की इस जैसी कोई और इमारत नहीं बनाई जाएगी |ताजमहल जो अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है उससे कहीं ज्यादा वो मशहूर है एक सच्ची और पाक मुहब्बत की निशानी के लिए जो एक बादशाह का अपनी महबूब बीवी के लिए अनमोल तोहफा है |
अपनी आलिशान मीनारों, बेमिसाल नक्काशी ,खुबसूरत गुम्बद और मेहराब के साथ जमुना नदी किनारे खड़ी ये सफ़ेद संगमरमरी इमारत पिछले कई दशको से अपनी शान और भव्यता में लाजवाब है |
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